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UPI में बड़ा बदलाव – 1 अगस्त से लागू होंगे नए नियम

UPI

भारत का सबसे भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI अब एक बड़ा अपडेट लेकर आ रहा है। 1 अगस्त से सभी UPI उपयोगकर्ताओं के लिए नए नियम लागू होंगे। इन नियमों में बैलेंस चेक करने की सीमा तय की गई है, और ऑटो पेमेंट्स सिर्फ विशेष समय के दौरान ही किए जा सकेंगे। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित और तेज़ बनाना है।

अगर आप Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM जैसे UPI ऐप्स का उपयोग करते हैं, तो यह बदलाव सीधे आपके रोज़मर्रा के भुगतान व्यवहार को प्रभावित करने वाला है।

क्यों किए जा रहे हैं UPI में बदलाव?

UPI आज भारत की वित्तीय प्रणाली की रीढ़ बन चुका है और देश के 85 प्रतिशत से अधिक डिजिटल लेनदेन इसी माध्यम से हो रहे हैं। लेकिन हाल के महीनों में UPI को कई बार तकनीकी गड़बड़ियों और सर्वर डाउन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिससे लाखों उपयोगकर्ता प्रभावित हुए।

इन समस्याओं से बचने और भविष्य में सिस्टम को स्थिर बनाए रखने के लिए, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नियम बैंकों और पेमेंट ऐप्स – दोनों पर लागू होंगे।

UPI में क्या बदलाव किया जारहा है?

चलिए जानते हैं की UPI में क्या क्या सब बदलाव किया जारहा है। और उनके कारण क्या है वो भी जान लेते हैं।

बैलेंस चेक करने की सीमा तय

अब तक UPI उपयोगकर्ता दिन में अनगिनत बार बैंक बैलेंस चेक कर सकते थे, लेकिन 1 अगस्त से यह सुविधा सीमित कर दी जाएगी। एक ऐप से एक दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस देखा जा सकेगा। हर UPI ट्रांजैक्शन के बाद उपलब्ध बैलेंस स्क्रीन पर अपने आप दिखेगा। इसका उद्देश्य सिस्टम पर होने वाले अनावश्यक API अनुरोधों को कम करना है, ताकि नेटवर्क धीमा न हो।

लिंक्ड अकाउंट्स देखने पर भी रोक

जब भी कोई उपयोगकर्ता देखता है कि उसके UPI में कौन-कौन से बैंक खाते जुड़े हैं, तो सिस्टम एक API कॉल करता है। अब यह प्रक्रिया भी एक दिन में केवल 25 बार ही की जा सकेगी। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि यह प्रक्रिया स्वतः (ऑटोमेटिक) नहीं हो सकेगी — उपयोगकर्ता को हर बार मैन्युअली ही रिक्वेस्ट करनी होगी।

ऑटो पेमेंट्स के लिए तय होंगे खास समय

EMI, म्यूचुअल फंड्स या सब्सक्रिप्शन जैसे रिकरिंग पेमेंट्स अब केवल ऑफ-पीक घंटों में ही प्रोसेस किए जाएंगे। यह कदम नेटवर्क पर दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है। नए नियमों के अनुसार, ऑटो डेबिट की अनुमति केवल तीन समय सीमाओं में दी जाएगी – सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 से 5 बजे के बीच और रात 9:30 बजे के बाद।

हर ऑटो डेबिट प्रयास को चार बार तक दोहराने की अनुमति होगी, जिसमें चौथा प्रयास केवल पेमेंट की स्थिति जांचने और पेमेंट रिवर्स करने के लिए होगा।

पेंडिंग लेनदेन पर निगरानी की नई व्यवस्था

अगर किसी का भुगतान पेंडिंग रहता है, तो अब उपयोगकर्ता उसकी स्थिति केवल तीन बार देख सकेगा। हर बार स्थिति देखने के बीच कम से कम 90 सेकंड का अंतर आवश्यक होगा। यह सिस्टम पर अतिरिक्त लोड को कम करने के लिए किया गया है।

पेमेंट रिवर्सल पर भी लगी सीमा

अब एक महीने में अधिकतम 10 पेमेंट रिवर्सल अनुरोध किए जा सकेंगे। इन दस में से केवल पांच अनुरोध ही भेजने वाला (sender) स्वयं कर सकेगा। यह नियम सिस्टम को सुरक्षित रखने और दुरुपयोग को रोकने के लिए लाया गया है।

भुगतान से पहले दिखेगा प्राप्तकर्ता का बैंक नाम

धोखाधड़ी और गलत व्यक्ति को भुगतान जैसे मामलों को रोकने के लिए अब UPI ऐप्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्रांजैक्शन से पहले उपयोगकर्ता को प्राप्तकर्ता का रजिस्टर्ड बैंक नाम स्क्रीन पर दिखे। इससे ग्राहक अंतिम क्षण में सुनिश्चित कर सकेगा कि वह सही व्यक्ति को पैसा भेज रहा है या नहीं।

नियम न मानने पर कार्रवाई तय

NPCI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई बैंक या पेमेंट ऐप 31 जुलाई तक इन नए नियमों को लागू नहीं करता, तो उसकी API सेवाएं बंद की जा सकती हैं या नए ग्राहकों को जोड़ने से रोका जा सकता है। इससे यह भी तय हो जाएगा कि नियमों का पालन सभी संस्थानों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाए।

अब UPI का उपयोग करते समय बैलेंस चेक, ऑटो डेबिट और लिंक्ड अकाउंट्स एक्सेस जैसी सुविधाओं पर स्पष्ट और सख्त सीमाएं लागू होंगी। ये सभी कदम डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अधिक तेज़, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाए गए हैं।

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