India में Semiconductor : अब China और Taiwan को कहो bye bye

Semiconductor

इस वक्त पूरी दुनिया में Semiconductor की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह एक हाईटेक युग है, जहां हर दिन नई-नई तकनीकों का आविष्कार हो रहा है और इनमें सेमीकंडक्टर का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। आधुनिक जीवन का सेमीकंडक्टर विज्ञान अब एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अधिक कुशल और हमारे जीवन को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बड़ा ऐलान किया कि भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने कहा कि मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर चिप्स 2025 के अंत तक बाजार में उपलब्ध होंगी।

Semiconductor चिप क्या है?

जब आप अपने स्मार्टफोन, कंप्यूटर या लैपटॉप में कोई कमांड देते हैं, तो वह पलक झपकते ही पूरा हो जाता है। यह तेजी और सटीकता एक छोटी सी चिप के कारण संभव होती है जिसे सेमीकंडक्टर चिप कहते हैं। यह चिप सिलिकॉन से बनी होती है और प्रोसेसिंग, मेमोरी स्टोरेज तथा सिग्नल एम्प्लीफिकेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप्स, RAM और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) जैसी चीजें भी सेमीकंडक्टर चिप के ही प्रकार हैं। इन चिप्स की वजह से डिवाइस तेज़ी से प्रतिक्रिया करते हैं और उपयोगकर्ता को त्वरित परिणाम मिलते हैं।

Semiconductor क्या है और यह कैसे काम करता है?

सेमीकंडक्टर एक ऐसा पदार्थ है जिसमें विद्युत धारा का प्रवाह न तो पूरी तरह से रुकता है और न ही पूरी तरह से आसानी से बहता है। धातुएं कंडक्टर कहलाती हैं क्योंकि इनमें करंट आसानी से बहता है। वहीं इंसुलेटर वे पदार्थ हैं जिनमें करंट बिल्कुल भी नहीं बहता। इन दोनों के बीच आने वाले पदार्थ को सेमीकंडक्टर कहते हैं।

आज ज्यादातर चिप्स सिलिकॉन से बनाए जाते हैं। हालांकि इसके अलावा जर्मेनियम, सिलिकॉन कार्बाइड, गैलियम नाइट्राइड और गैलियम आर्सेनाइड का भी उपयोग होता है।

Semiconductor चिप की भूमिका

सेमीकंडक्टर चिप को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का “दिमाग” कहा जाता है। प्रत्येक चिप में लाखों-करोड़ों ट्रांजिस्टर होते हैं, जो डिवाइस तक डेटा और सिग्नल पहुंचाने का काम करते हैं। जिस प्रकार हमारे दिमाग तक न्यूरॉन्स के माध्यम से जानकारी पहुंचती है, उसी प्रकार यह चिप डिवाइस के सभी घटकों तक जानकारी पहुंचाती है। इसे तकनीकी दुनिया का ईंधन यानी टेक्नोलॉजिकल फ्यूल भी कहा जाता है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चलाने की शक्ति देती है।

आज यह चिप मोबाइल, लैपटॉप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाईटेक गाड़ियों, 5G और 6G नेटवर्क जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बेहद अहम है। इसके अलावा आधुनिक युद्ध के दौर में ड्रोन, मिसाइल, सुपरकंप्यूटर और मॉनिटरिंग सिस्टम में भी इसका उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Semiconductor का इतिहास

सेमीकंडक्टर के इतिहास पर नजर डालें तो 1947 में सबसे पहले सेमीकंडक्टर का निर्माण हुआ। इसके बाद 1958 में इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का आविष्कार हुआ जिसे चिप कहा जाता है।

  • विलियम शॉकले को सेमीकंडक्टर का जनक कहा जाता है।
  • जैक किलबी को सेमीकंडक्टर चिप का जनक माना जाता है।

आज सेमीकंडक्टर चिप्स को सिलिकॉन और गैलियम नाइट्राइड जैसी सामग्री के जरिए तैयार किया जाता है। इसके अलावा जर्मेनियम, गैलियम आर्सेनाइड और सिलिकॉन कार्बाइड का भी इस्तेमाल किया जाता है।

Semiconductor चिप बनाने की जटिल प्रक्रिया

चिप का निर्माण एक बेहद जटिल और बहु-स्तरीय प्रक्रिया है। सबसे पहले अत्यंत शुद्ध सिलिकॉन का चयन किया जाता है जिसमें अशुद्धियां न के बराबर होती हैं। इसके बाद ऑक्सीकरण, केमिकल वेपर डिपॉजिशन, लिथोग्राफी, एचिंग, डिफ्यूजन, इम्प्लांटेशन और मेटलाइजेशन जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसके बाद डाई बॉन्डिंग, वायर बॉन्डिंग, पैकेजिंग और अंत में टेस्टिंग तथा क्वालिटी कंट्रोल के चरण पूरे किए जाते हैं। इतने सारे स्टेप्स के बाद ही एक चिप तैयार होकर बाजार में आती है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग की जाती है।

किन देशों में बनती हैं सेमीकंडक्टर चिप्स?

वर्तमान में भारत सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन नहीं करता बल्कि इन्हें अन्य देशों से आयात करता है। दुनिया में सबसे ज्यादा चिप डिजाइन अमेरिका में की जाती है, जबकि ताइवान और दक्षिण कोरिया इनका बड़े पैमाने पर निर्माण करते हैं। चीन में मुख्य रूप से चिप्स की पैकेजिंग और असेंबली का काम होता है।

ताइवान दुनिया की 60% से ज्यादा और लगभग 90% उच्च गुणवत्ता वाली चिप्स का उत्पादन करता है। हालांकि चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग पर खतरा मंडरा रहा है। यही कारण है कि भारत तेजी से इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

Semiconductor का ग्लोबल मार्केट और भारत की स्थिति

वैश्विक स्तर पर Semiconductor उद्योग 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत का सेमीकंडक्टर बाजार भी लगातार बढ़ रहा है।

  • 2023 में भारत का बाजार लगभग 38 अरब डॉलर का था।
  • 2024-25 तक यह 45-50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
  • 2030 तक यह बाजार 100-110 अरब डॉलर का हो सकता है।

यदि भारत यह लक्ष्य हासिल कर लेता है तो वह अमेरिका और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। भारत का चिप बाजार 16% की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है, जिससे 2030 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की हिस्सेदारी लगभग 6.21% तक हो सकती है।

भारत में Semiconductor निर्माण की पहल

भारत सरकार ने Semicon India प्रोग्राम और India Semiconductor मिशन जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं। इस क्षेत्र में अब तक 76,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ है। 2024-25 के बजट में भी 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।

नोएडा और बेंगलुरु में हाल ही में 3 नैनोमीटर चिप डिजाइन केंद्र शुरू किए गए हैं। इसके अलावा गुजरात, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में भी सेमीकंडक्टर तकनीक को लेकर नए इनोवेशन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

भारत को Semiconductor प्लांट से होने वाले फायदे

Semiconductor उत्पादन के लिए भारत का खुद का प्लांट बनना देश के लिए बेहद फायदेमंद होगा। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और सप्लाई चेन में आने वाली समस्याओं का समाधान होगा। COVID-19 के दौरान जब चिप की कमी के कारण कई उद्योग प्रभावित हुए थे, तब इसकी आवश्यकता और स्पष्ट हुई।

यह प्रोजेक्ट “Make in India” और “Digital India” को गति देगा। इससे लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। भारत अब सिर्फ चिप का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता भी बनेगा। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतें भी कम होंगी, जिससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और गाड़ियां आम लोगों के लिए अधिक किफायती होंगी।

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