Online Gaming Banned? पिछले एक दशक में भारत में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री ने तेज़ी से ग्रोथ की है। ड्रीम 11, MPL, रमी सर्कल, पोकर बाज़ी जैसे प्लेटफॉर्म्स करोड़ों यूज़र्स को आकर्षित कर चुके हैं। इन खेलों में खिलाड़ी वास्तविक पैसे का दांव लगाते हैं और बदले में कैश रिवॉर्ड जीतने का मौका पाते हैं। लेकिन अब सरकार ने ऐसे गेम्स पर बड़ा कदम उठाते हुए पूरी तरह बैन लगाने की तैयारी कर ली है।
Online Betting games/Apps को ban क्यों किआ जारहा है?
हाल के वर्षों में ऑनलाइन मनी गेमिंग को लेकर कई गंभीर समस्याएँ सामने आईं। जैसे युवाओं में बढ़ता नशा (Addiction): कई खिलाड़ी लगातार पैसा गंवाने लगे, जिसके चलते मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और पारिवारिक विवाद बढ़े। आर्थिक नुकसान: कई मामलों में लोग अपनी बचत, यहाँ तक कि घर-परिवार की संपत्ति तक दांव पर लगा बैठे। सुसाइड और अपराध: पैसों की हानि और कर्ज़ के कारण आत्महत्या जैसी घटनाएँ भी रिपोर्ट हुईं। मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क: जांच एजेंसियों ने कई प्लेटफॉर्म्स पर अवैध लेन-देन और टेरर फंडिंग तक के आरोप लगाए।
सरकार का तर्क है कि जब पहले से ही जुआ और लॉटरी पर सख्त पाबंदी है, तो रियल मनी गेमिंग को कैसे खुली छूट दी जा सकती है।
“The promotion and regulation of online gaming bill 2025”
लोकसभा में पेश किए गए इस बिल के तहत मनी-बेस्ड गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। जो डेवलपर्स, प्रमोटर्स, विज्ञापनदाता और प्लेटफॉर्म्स ऐसे गेम चलाएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। 3 साल की जेल और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। बार-बार नियम तोड़ने पर प्लेटफॉर्म्स को शटडाउन और डोमेन ब्लॉक किया जा सकेगा।
हालाँकि, सरकार ने यह साफ किया है कि ई-स्पोर्ट्स और स्किल-बेस्ड कॉम्पिटिटिव गेमिंग पर कोई रोक नहीं होगी। इसके लिए एक नई संस्था “नेशनल ई-स्पोर्ट्स अथॉरिटी” बनाई जाएगी, जो टूर्नामेंट्स और प्रोफेशनल गेमिंग को रेगुलेट करेगी।
इंडस्ट्री की चिंताएँ
भारत का online gaming market फिलहाल $3.7 बिलियन का है और अनुमान है कि 2029 तक यह $9 बिलियन तक पहुँच सकता है। इसमें से 86% रेवेन्यू रियल मनी गेम्स से आता है।
गेमिंग इंडस्ट्री का कहना है कि इस बैन से हजारों स्टार्टअप्स और कंपनियाँ बंद हो जाएँगी। विदेशी निवेश (FDI) पर बुरा असर पड़ेगा। लाखों नौकरियों पर संकट आएगा। बैन की बजाय सही रेगुलेशन की ज़रूरत है, क्योंकि पूरी तरह रोक लगाने से लोग अनरेगुलेटेड ऐप्स की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे फ्रॉड और बढ़ेगा। ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन ने भी सरकार से अपील की है कि “आउटराइट बैन” की बजाय “प्रोग्रेसिव रेगुलेशन” लागू किया जाए।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
चीन: नाबालिकों के लिए गेमिंग टाइम लिमिट तय है और मनी-बेस्ड ऑनलाइन गैंबलिंग पूरी तरह बैन है।
अमेरिका: अलग-अलग राज्यों में अलग नियम हैं। कुछ जगहों पर फैंटेसी स्पोर्ट्स लीगल हैं।
ब्रिटेन: गैंबलिंग रेगुलेटेड है और उस पर भारी टैक्स लगाया जाता है। ई-स्पोर्ट्स को अलग से मान्यता मिली हुई है।
भारत का प्रस्तावित कानून दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में गिना जाएगा, क्योंकि यहां सीधा पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
यह बिल आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लोकसभा में पेश किया गया है। अब इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाएगा, जहाँ विस्तृत समीक्षा होगी। इसके बाद संसद में बहस और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून लागू होगा।
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